Oops! It appears that you have disabled your Javascript. In order for you to see this page as it is meant to appear, we ask that you please re-enable your Javascript!
हाज़िर जवाब पर आपका स्वागत है!
1 पसंद 0 नापसंद
33 बार देखा गया
पूर्व (7.6k अंक) द्वारा में धर्म और अध्यात्म पूछा गया
What is the secret of Shiva's trident, third eye and Nandi?

आपका उत्तर

अपना नाम प्रदर्शित करने के लिए (विकल्प):
गोपनीयता: आपका ईमेल पता सूचनाएं थीसिस भेजने के लिए ही इस्तेमाल किया जाएगा.
स्पैम विरोधी सत्यापन:
भविष्य में इस सत्यापन बचने के लिए, कृपया लॉग इन या रजिस्टर करें.

1 उत्तर

0 जैसा 0 नापसंद
पूर्व (25.2k अंक) द्वारा उत्तर
 
सबसे अच्छा उत्तर
तीसरी आंख का मतलब है कि आपका बोध जीवन के द्वैत से परे चला गया है। तब आप जीवन को सिर्फ उस रूप में नहीं देखते जो आपके जीवित रहने के लिए जरूरी है। बल्कि आप जीवन को उस तरह देख पाते हैं, जैसा वह वाकई है।

शिव को हमेशा त्रयंबक कहा गया है, क्योंकि उनकी एक तीसरी आंख है। तीसरी आंख का मतलब यह नहीं है कि किसी के माथे में दरार पड़ी और वहां कुछ निकल आया! इसका मतल‍ब सिर्फ यह है कि बोध या अनुभव का एक दूसरा आयाम खुल गया है। दो आंखें सिर्फ भौतिक चीजों को देख सकती हैं। अगर मैं अपना हाथ उन पर रख लूं, तो वे उसके परे नहीं देख पाएंगी। उनकी सीमा यही है। अगर तीसरी आंख खुल जाती है, तो इसका मतलब है कि बोध का एक दूसरा आयाम खुल जाता है जो कि भीतर की ओर देख सकता है। इस बोध से आप जीवन को बिल्कुल अलग ढंग से देख सकते हैं। इसके बाद दुनिया में जितनी चीजों का अनुभव किया जा सकता है, उनका अनुभव हो सकता है। आपके बोध के विकास के लिए सबसे अहम चीज यह है – कि आपकी ऊर्जा को विकसित होना होगा और अपना स्तर ऊंचा करना होगा। योग की सारी प्रक्रिया यही है कि आपकी ऊर्जा को इस तरीके से विकसित किया जाए और सुधारा जाए कि आपका बोध बढ़े और तीसरी आंख खुल जाए। तीसरी आंख दृष्टि की आंख है। दोनों भौतिक आंखें सिर्फ आपकी इंद्रियां हैं।

वे मन में तरह-तरह की फालतू बातें भरती हैं क्योंकि आप जो देखते हैं, वह सच नहीं है। आप इस या उस व्यक्ति को देखकर उसके बारे में कुछ अंदाजा लगाते हैं, मगर आप उसके अंदर शिव को नहीं देख पाते। आप चीजों को इस तरह देखते हैं, जो आपके जीवित रहने के लिए जरूरी हैं। कोई दूसरा प्राणी उसे दूसरे तरीके से देखता है, जो उसके जीवित रहने के लिए जरूरी है। इसीलिए हम इस दुनिया को माया कहते हैं। माया का मतलब है कि यह एक तरह का धोखा है। इसका मतलब यह नहीं है कि अस्तित्व एक कल्पना है। बस आप उसे जिस तरीके से देख रहे हैं, जिस तरह उसका अनुभव कर रहे हैं, वह सच नहीं है। इसलिए एक और आंख को खोलना जरूरी है, जो ज्यादा गहराई में देख सके। तीसरी आंख का मतलब है कि आपका बोध जीवन के द्वैत से परे चला गया है। तब आप जीवन को सिर्फ उस रूप में नहीं देखते जो आपके जीवित रहने के लिए जरूरी है। बल्कि आप जीवन को उस तरह देख पाते हैं, जैसा वह वाकई है। हाल में ही एक वैज्ञानिक ने एक किताब लिखी है, जिसमें बताया गया है कि इंसानी आंख किस सीमा तक भौतिक अस्तित्व को देख सकती है। उनका कहना है कि इंसानी आंख भौतिक अस्तित्व का सिर्फ 0.00001 फीसदी देख सकती है। इसलिए अगर आप दो भौतिक आंखों से देखते हैं, तो आप वही देख सकते हैं, जो सामने होता है। अगर आप तीसरी आंख से देखते हैं, तो आप वह देख सकते हैं जिसका सामने आना अभी बाकी है और जो सामने आ सकता है। हमारे देश और हमारी परंपरा में, ज्ञान का मतलब किताबें पढ़ना, किसी की बातचीत सुनना या यहां-वहां से जानकारी इकट्ठा करना नहीं है। ज्ञान का मतलब जीवन को एक नई दृष्टि से देखना है। किसी कारण से महाशिवरात्रि के दिन प्रकृति उस संभावना को हमारे काफी करीब ले आती है। ऐसा करना हर दिन संभव है। इस खास दिन का इंतजार करना हमारे लिए जरूरी नहीं है, मगर इस दिन प्रकृति उसे आपके लिए ज्यादा उपलब्ध बना देती है।

शिव का वाहन नंदी

नंदी का गुण यह है की, वह बस सजग होकर बैठा रहता है। यह बहुत अहम चीज है – वह सजग है, सुस्त नहीं है। वह आलसी की तरह नहीं बैठा है। वह पूरी तरह सक्रिय, पूरी सजगता से, जीवन से भरपूर बैठा है, ध्यान यही है। नंदी अनंत प्रतीक्षा का प्रतीक है। भारतीय संस्कृति में इंतजार को सबसे बड़ा गुण माना गया है। जो बस चुपचाप बैठकर इंतजार करना जानता है, वह कुदरती तौर पर ध्यानमग्न हो सकता है। नंदी को ऐसी उम्मीद नहीं है कि शिव कल आ जाएंगे। वह किसी चीज का अंदाजा नहीं लगाता या उम्मीद नहीं करता। वह बस इंतजार करता है। वह हमेशा इंतजार करेगा। यह गुण ग्रहणशीलता का मूल तत्व है। नंदी शिव का सबसे करीबी साथी है क्योंकि उसमें ग्रहणशीलता का गुण है। किसी मंदिर में जाने के लिए आपके अंदर नंदी का गुण होना चाहिए। ताकि आप बस बैठ सकें। इस गुण के होने का मतलब है – आप स्वर्ग जाने की कोशिश नहीं करेंगे, आप यह या वह पाने की कोशिश नहीं करेंगे – आप बस वहां बैठेंगे। लोगों को हमेशा से यह गलतफहमी रही है कि ध्यान किसी तरह की क्रिया है। नहीं – यह एक गुण है। यही बुनियादी अंतर है। प्रार्थना का मतलब है कि आप भगवान से बात करने की कोशिश कर रहे हैं। ध्यान का मतलब है कि आप भगवान की बात सुनना चाहते हैं। आप बस अस्तित्व को, सृष्टि की परम प्रकृति को सुनना चाहते हैं। आपके पास कहने के लिए कुछ नहीं है, आप बस सुनते हैं। नंदी का गुण यही है, वह बस सजग होकर बैठा रहता है। यह बहुत अहम चीज है – वह सजग है, सुस्त नहीं है। वह आलसी की तरह नहीं बैठा है। वह पूरी तरह सक्रिय, पूरी सजगता से, जीवन से भरपूर बैठा है, ध्यान यही है। ध्यान का मतलब मुख्य रूप से यही है कि वह इंसान अपना कोई काम नहीं कर रहा है। वह बस वहां मौजूद है। जब आप बस मौजूद होते हैं, तो आप अस्तित्व के विशाल आयाम के प्रति जागरूक हो जाते हैं जो हमेशा सक्रिय होता है। आप जागरूक हो जाते हैं कि आप उसका एक हिस्सा हैं। आप अब भी उसका एक हिस्सा हैं मगर यह जागरूकता – कि ‘मैं उसका एक हिस्सा हूं’ – ध्यान में मग्न होना है। नंदी उसी का प्रतीक है। वह बस बैठा रहकर हर किसी को याद दिलाता है, ‘तुम्हें मेरी तरह बैठना चाहिए।’ ‘ध्यानलिंग मंदिर के बाहर भी हमने एक बड़ा बैल स्थापित किया है। उसका संदेश बहुत साफ है, आपको अपनी सभी फालतू बातों को बाहर छोड़कर ध्यानलिंग में जाना चाहिए।’ – सद्‌गुरु।

शिव का त्रिशूल

शिव का त्रिशूल जीवन के तीन मूल पहलुओं को दर्शाता है। योग परंपरा में उसे रुद्र, हर और सदाशिव कहा जाता है। ये जीवन के तीन मूल आयाम हैं, जिन्हें कई रूपों में दर्शाया गया है। उन्हें इड़ा, पिंगला और सुषुम्ना भी कहा जा सकता है। ये तीनों प्राणमय कोष यानि मानव तंत्र के ऊर्जा शरीर में मौजूद तीन मूलभूत नाड़ियां हैं – बाईं, दाहिनी और मध्य। नाड़ियां शरीर में उस मार्ग या माध्यम की तरह होती हैं जिनसे प्राण का संचार होता है। तीन मूलभूत नाड़ियों से 72,000 नाड़ियां निकलती हैं। इन नाड़ियों का कोई भौतिक रूप नहीं होता। यानी अगर आप शरीर को काट कर इन्हें देखने की कोशिश करें तो आप उन्हें नहीं खोज सकते। लेकिन जैसे-जैसे आप अधिक सजग होते हैं, आप देख सकते हैं कि ऊर्जा की गति अनियमित नहीं है, वह तय रास्तों से गुजर रही है। प्राण या ऊर्जा 72,000 विभिन्न रास्तों से होकर गुजरती है। इड़ा और पिंगला जीवन के बुनियादी द्वैत के प्रतीक हैं। इस द्वैत को हम परंपरागत रूप से शिव और शक्ति का नाम देते हैं। या आप इसे बस पुरुषोचित और स्त्रियोचित कह सकते हैं, या यह आपके दो पहलू – तर्क-बुद्धि और सहज-ज्ञान हो सकते हैं। शिव का त्रिशूल जीवन के तीन मूल पहलुओं को दर्शाता है। योग परंपरा में उसे रुद्र, हर और सदाशिव कहा जाता है। ये जीवन के तीन मूल आयाम हैं, जिन्हें कई रूपों में दर्शाया गया है। उन्हें इड़ा, पिंगला और सुषुम्ना भी कहा जा सकता है।

जीवन की रचना भी इसी के आधार पर होती है। इन दोनों गुणों के बिना, जीवन ऐसा नहीं होता, जैसा अभी है। सृजन से पहले की अवस्था में सब कुछ मौलिक रूप में होता है। उस अवस्था में द्वैत नहीं होता। लेकिन जैसे ही सृजन होता है, उसमें द्वैतता आ जाती है। पुरुषोचित और स्त्रियोचित का मतलब लिंग भेद से – या फिर शारीरिक रूप से पुरुष या स्त्री होने से – नहीं है, बल्कि प्रकृति में मौजूद कुछ खास गुणों से है। प्रकृति के कुछ गुणों को पुरुषोचित माना गया है और कुछ अन्य गुणों को स्त्रियोचित। आप भले ही पुरुष हों, लेकिन यदि आपकी इड़ा नाड़ी अधिक सक्रिय है, तो आपके अंदर स्त्रियोचित गुण हावी हो सकते हैं। आप भले ही स्त्री हों, मगर यदि आपकी पिंगला अधिक सक्रिय है तो आपमें पुरुषोचित गुण हावी हो सकते हैं। अगर आप इड़ा और पिंगला के बीच संतुलन बना पाते हैं तो दुनिया में आप प्रभावशाली हो सकते हैं। इससे आप जीवन के सभी पहलुओं को अच्छी तरह संभाल सकते हैं। अधिकतर लोग इड़ा और पिंगला में जीते और मरते हैं, मध्य स्थान सुषुम्ना निष्क्रिय बना रहता है। लेकिन सुषुम्ना मानव शरीर-विज्ञान का सबसे अहम पहलू है। जब ऊर्जा सुषुम्ना नाड़ी में प्रवेश करती है, जीवन असल में तभी शुरू होता है। आप एक नए किस्म का संतुलन पा लेते हैं, एक अंदरूनी संतुलन, जिसमें बाहर चाहे जो भी हो, आपके भीतर एक खास जगह बन जाती है, जो किसी भी तरह की हलचल में कभी अशांत नहीं होती, जिस पर बाहरी हालात का असर नहीं पड़ता। आप चेतनता की चोटी पर सिर्फ तभी पहुंच सकते हैं, जब आप अपने अंदर यह स्थिर अवस्था बना लें

संबंधित प्रश्न

2 जैसा 0 नापसंद
2 उत्तर 73 बार देखा गया
1 पसंद 0 नापसंद
1 उत्तर 666 बार देखा गया
अप्रैल 27, 2017 lalit paharia (3.5k अंक) द्वारा में बीमा पूछा गया
0 जैसा 0 नापसंद
1 उत्तर 49 बार देखा गया
0 जैसा 0 नापसंद
2 उत्तर 102 बार देखा गया
नवम्बर 14, 2022 Neeraj Ojha (2.2k अंक) द्वारा में धर्म और अध्यात्म पूछा गया
2 जैसा 0 नापसंद
1 उत्तर 51 बार देखा गया
0 जैसा 0 नापसंद
1 उत्तर 14 बार देखा गया
1 पसंद 0 नापसंद
1 उत्तर 49 बार देखा गया
1 पसंद 0 नापसंद
1 उत्तर 52 बार देखा गया
1 पसंद 0 नापसंद
1 उत्तर 64 बार देखा गया
0 जैसा 0 नापसंद
1 उत्तर 272 बार देखा गया
मई 13, 2019 sachin jangam (2.9k अंक) द्वारा में सामान्य ज्ञान पूछा गया
1 पसंद 0 नापसंद
1 उत्तर 70 बार देखा गया
फ़रवरी 21, 2022 Himanshu Jangam (2.4k अंक) द्वारा में प्रश्नोत्तरी पूछा गया
1 पसंद 0 नापसंद
2 उत्तर 128 बार देखा गया
0 जैसा 0 नापसंद
1 उत्तर 72 बार देखा गया
0 जैसा 0 नापसंद
1 उत्तर 50 बार देखा गया
0 जैसा 0 नापसंद
1 उत्तर 45 बार देखा गया
0 जैसा 0 नापसंद
0 उत्तर 31 बार देखा गया
1 पसंद 0 नापसंद
1 उत्तर 78 बार देखा गया
1 पसंद 0 नापसंद
1 उत्तर 270 बार देखा गया
1 पसंद 0 नापसंद
1 उत्तर 58 बार देखा गया
फ़रवरी 21, 2022 Himanshu Jangam (2.4k अंक) द्वारा में प्रश्नोत्तरी पूछा गया
1 पसंद 0 नापसंद
1 उत्तर 73 बार देखा गया
फ़रवरी 21, 2022 Himanshu Jangam (2.4k अंक) द्वारा में प्रश्नोत्तरी पूछा गया
0 जैसा 0 नापसंद
1 उत्तर 52 बार देखा गया
0 जैसा 0 नापसंद
1 उत्तर 102 बार देखा गया
जनवरी 28, 2023 Neeraj Ojha (2.2k अंक) द्वारा में धर्म और अध्यात्म पूछा गया
0 जैसा 0 नापसंद
2 उत्तर 105 बार देखा गया
जनवरी 28, 2023 Neeraj Ojha (2.2k अंक) द्वारा में धर्म और अध्यात्म पूछा गया
0 जैसा 0 नापसंद
1 उत्तर 75 बार देखा गया
जनवरी 28, 2023 Neeraj Ojha (2.2k अंक) द्वारा में धर्म और अध्यात्म पूछा गया
0 जैसा 0 नापसंद
1 उत्तर 89 बार देखा गया
0 जैसा 0 नापसंद
1 उत्तर 58 बार देखा गया
दिसम्बर 17, 2022 Neeraj Ojha (2.2k अंक) द्वारा में धर्म और अध्यात्म पूछा गया
0 जैसा 0 नापसंद
1 उत्तर 1.1k बार देखा गया
नवम्बर 13, 2018 Rosella (66 अंक) द्वारा में धर्म और अध्यात्म पूछा गया
2 जैसा 0 नापसंद
4 उत्तर 4.5k बार देखा गया
नवम्बर 12, 2018 Rkkhare (9 अंक) द्वारा में धर्म और अध्यात्म पूछा गया
0 जैसा 0 नापसंद
1 उत्तर 78 बार देखा गया
0 जैसा 0 नापसंद
1 उत्तर 55 बार देखा गया
0 जैसा 0 नापसंद
0 उत्तर 78 बार देखा गया
0 जैसा 0 नापसंद
1 उत्तर 140 बार देखा गया
2 जैसा 0 नापसंद
1 उत्तर 70 बार देखा गया
अक्टूबर 20, 2021 harish jangam (28.9k अंक) द्वारा में सामान्य ज्ञान पूछा गया
1 पसंद 0 नापसंद
1 उत्तर 59 बार देखा गया
1 पसंद 0 नापसंद
1 उत्तर 63 बार देखा गया
1 पसंद 0 नापसंद
1 उत्तर 59 बार देखा गया
0 जैसा 0 नापसंद
1 उत्तर 74 बार देखा गया
3 जैसा 0 नापसंद
1 उत्तर 413 बार देखा गया
3 जैसा 0 नापसंद
1 उत्तर 504 बार देखा गया
1 पसंद 0 नापसंद
1 उत्तर 683 बार देखा गया

नये प्रश्न

चाय कैसे बनाये ?
0 मत | अनुत्तरित
Scientific Name of Computer?
0 मत | अनुत्तरित
Who is the father of Computer science?
0 मत | अनुत्तरित
LG किस देश की कंपनी है ?
0 मत | अनुत्तरित
शिव का त्रिशुल, तीसरी आंख और नंदी का क्या है रहस्य?
हाज़िर जवाब, विश्व की प्रथम हिन्दी प्रश्न उत्तर वेबसाइट पर आपका स्वागत है, जहां आप समुदाय के अन्य सदस्यों से हिंदी में प्रश्न पूछ सकते हैं और हिंदी में उत्तर प्राप्त कर सकते हैं |
प्रश्न पूछने या उत्तर देने के लिये आपको हिंदी मे टाइप करने की जरुरत नहीं हैं, आप हिंग्लिश (HINGLIS) मे भी टाइप कर सकते है!

डाउनलोड हाज़िर जवाब एंड्राइड ऍप

9.1k प्रश्न

12.5k उत्तर

3.4k उपयोगकर्ता



Website and app development

Website and app development


...